चीन के उइगर (Uighur) मुसलमानों पर उत्पीड़न के मामले में अमेरिका ने सख्त रुख अपनाया है.



चीन के उइगर (Uighur) मुसलमानों पर उत्पीड़न के मामले में अमेरिका ने सख्त रुख अपनाया है.




चीन के उइगर (Uighur) मुसलमानों पर उत्पीड़न के मामले में अमेरिका ने सख्त रुख अपनाया है

. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने इस संबंध में एक बिल पर हस्ताक्षर किए हैं, उनकी मंजूरी के साथ ही यह बिल अब कानून बन गया है. इस बिल में उइगर मुसलमानों के दमन के लिए ज़िम्मेदार चीनी अधिकारियों पर प्रतिबंध की बात कही गई है.  

प्रतिनिधि सभा और सीनेट ने विधेयक ‘उइगर मानवाधिकार नीति अधिनियम 2020’ मई में राष्ट्रपति को भेजा था. बुधवार को जारी एक बयान में ट्रंप ने कहा, ‘यह कानून मानवाधिकारों का उल्लंघन, चीन में उइगर और अन्य अल्पसंख्यकों की जातीय पहचान और धार्मिक विश्वासों को मिटाने, उन्हें प्रताड़ित करने उनसे जबरन श्रम कराने वालों को जवाबदेह ठहरता है’.

यह कानून, चीनी कम्युनिस्ट पार्टी द्वारा उइगर और अन्य मुस्लिम अल्पसंख्यकों के साथ किए जा रहे व्यवहार की निंदा करता है और चीन के शिनजियांग प्रांत (Xinjiang region) के शिविरों को बंद करने का आह्वान करता है, जहां संयुक्त राष्ट्र का मानना है कि इन शिविरों में दस लाख से अधिक मुस्लिमों को हिरासत में रखा गया है.

साथ ही यह ट्रंप प्रशासन को अल्पसंख्यक समूहों से दुर्व्यवहार के लिए जिम्मेदार व्यक्तियों की पहचान करने और उन्हें प्रतिबंधित करने का निर्देश देता है. बिल पर हस्ताक्षर करने के 180 दिनों के भीतर ट्रंप को कांग्रेस को एक रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी. जिसमें चीनी अधिकारियों सहित उस प्रत्येक व्यक्ति की पहचान का जिक्र होगा जो शिनजियांग प्रांत में मानवाधिकार के उल्लंघन,अल्पसंख्यकों को प्रताड़ित करने, बिना किसी आरोप के उन्हें हिरासत में रखने, उन पर मुकदमा चलाने, उन्हें जीवन के अधिकारों से वंचित रखने के लिए जिम्मेदार है. इन जिम्मेदार व्यक्तियों की पहचान के बाद अमेरिका अपने यहां उनकी संभावित संपत्तियों का पता लगायेगा और फिर उन्हें फ्रीज़ कर देगा. इसके साथ ही उनके अमेरिका आने पर भी पाबंदी रहेगी.


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यदि राष्ट्रपति चाहें तो वाइट हाउस कानूनों में शामिल प्रतिबंधों का घेरा ढीला कर सकता है, लेकिन इसके लिए उन्हें कांग्रेस को सूचित करना होगा. जब डोनाल्ड ट्रंप इस कानून पर हस्ताक्षर कर रहे थे, द वॉल स्ट्रीट जर्नल में उनके पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जॉन बोल्टन की किताब का एक अंश प्रकाशित हुआ. जिसमें आरोप लगाया गया है कि ट्रंप ने 2019 में G20 की बैठक के दौरान चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ शिनजियांग प्रांत में शिविरों के निर्माण के लिए सहमति दिखाई थी. उन्होंने कहा था कि शी को शिविरों के निर्माण पर आगे बढ़ना चाहिए,.


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